भाई, अगर आप लखनऊ, पटना, दिल्ली, गोरखपुर या सिवान में रजिस्टर्ड रिक्रूटिंग एजेंसी चलाते हो, तो ये बात आप अच्छे से जानते हो: गल्फ की हर भर्ती दो कागज़ों से शुरू होती है, डिमांड लेटर और पावर ऑफ़ अटॉर्नी। यही दो कागज़ तय करते हैं कि आप जॉब का विज्ञापन दे सकते हो या नहीं, ईमाइग्रेट पर क्लियरेंस मिलेगा या नहीं, और आपके कैंडिडेट समय पर उड़ेंगे या वीज़ा लेकर घर बैठे रहेंगे।
ये गाइड एजेंसी के मालिकों और ऑफ़िस संभालने वाले स्टाफ़ के लिए है। इसमें बताया है कि विदेश मंत्रालय क्या कागज़ माँगता है, सोर्सिंग पर पैसा लगाने से पहले हर कागज़ में क्या देखना है, और कैंडिडेट की फ़ाइल पहले दिन से साफ़ कैसे रखनी है।
सरकार क्या कागज़ माँगती है
विदेश मंत्रालय की इमिग्रेशन क्लियरेंस वाली गाइड में साफ़ लिखा है कि स्किल्ड और सेमी-स्किल्ड कामगार के क्लियरेंस के लिए एजेंट को ये देना होता है (विदेश मंत्रालय की गाइड):
- कामगार का पासपोर्ट, कम से कम छह महीने चलने वाला, वीज़ा के साथ।
- गल्फ की कंपनी का ओरिजिनल कॉन्ट्रैक्ट, डिमांड लेटर और पावर ऑफ़ अटॉर्नी।
- सरकारी फ़ीस का चालान।
- प्रवासी भारतीय बीमा योजना की पॉलिसी।
कुछ कैटेगरी में शर्तें और सख़्त हैं। महिला कामगार और अनस्किल्ड कामगार के लिए कागज़ों पर उस देश में भारतीय एम्बेसी का अटेस्टेशन चाहिए, और कुछ मामलों में कंपनी को एम्बेसी में पैसा भी जमा करना होता है। नियम कैटेगरी और समय के साथ बदलते हैं, इसलिए हर नए क्लाइंट से पहले ईमाइग्रेट पोर्टल या अपने प्रोटेक्टर ऑफ़ इमिग्रेंट्स के ऑफ़िस से ताज़ा नियम पक्का कर लो।
डिमांड लेटर में क्या-क्या देखना है
डिमांड लेटर मतलब कंपनी की लिखित माँग कि उसे कितने और कौन से कामगार चाहिए। विज्ञापन देने से पहले देखो कि इसमें ये सब हो:
- कंपनी की पूरी डिटेल: पूरा नाम, पता, कमर्शियल रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस नंबर, संपर्क वाले आदमी का नाम, साइन और मोहर।
- ट्रेड और गिनती: हर ट्रेड का सही नाम और कितने लोग। "लेबर – 50" जैसी गोल-मोल माँग आगे वीज़ा और क्लियरेंस में फँसाती है।
- सैलरी और सुविधा: बेसिक, अलाउंस, खाना, रहना, आना-जाना, ओवरटाइम और ड्यूटी के घंटे, हर ट्रेड के लिए अलग।
- कॉन्ट्रैक्ट कितने साल का और प्रोबेशन।
- शर्तें: उम्र, एक्सपीरियंस, पढ़ाई, और गल्फ एक्सपीरियंस ज़रूरी है या नहीं।
- तारीख़: ताज़ा हो। पुरानी डिमांड का मतलब हो सकता है कि भर्ती पहले ही हो चुकी।
ट्रेड का नाम उस वीज़ा से मिलाओ जो कंपनी सच में दे सकती है। जैसे कुवैत में 2026 के नियम में कामगार का जॉब टाइटल उसकी पढ़ाई और असली काम से मेल खाना चाहिए, वरना बाद में वीज़ा अटक सकता है। पूरी बात हमारी कुवैत वीज़ा कागज़ वाली गाइड में है।
पावर ऑफ़ अटॉर्नी में क्या-क्या देखना है
पावर ऑफ़ अटॉर्नी वो कागज़ है जिससे गल्फ की कंपनी आपकी एजेंसी को अपनी तरफ़ से भर्ती करने का हक़ देती है। देखो कि:
- इसमें आपकी एजेंसी का नाम बिल्कुल वैसा हो जैसा ईमाइग्रेट पर रजिस्टर्ड है, हो सके तो रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ।
- कंपनी के हक़दार अफ़सर का साइन और मोहर हो।
- लिखा हो कि आप क्या-क्या कर सकते हो: विज्ञापन, इंटरव्यू, सिलेक्शन, वीज़ा और क्लियरेंस का काम, और किन ट्रेड के लिए।
- इसकी मियाद आपकी पूरी भर्ती तक चले।
- जहाँ नियम कहे, वहाँ अटेस्ट हो।
किसी दूसरी एजेंसी के नाम वाली पावर ऑफ़ अटॉर्नी, या बिना कंपनी डिटेल वाली "जनरल" पावर ऑफ़ अटॉर्नी काम की नहीं। कोई तीसरा आदमी कहे "तैयार डिमांड और पावर दे देंगे", और कंपनी से आपकी बात ही न हो, तो समझ जाओ कि गड़बड़ है।
धोखे के निशान: यहाँ रुक जाओ
- कंपनी अपने ऑफ़िशियल फ़ोन या ईमेल पर मिलती ही नहीं।
- डिमांड में सैलरी उस ट्रेड के बाज़ार से बहुत कम या बहुत ज़्यादा है।
- डिमांड में लिखा है कि वीज़ा या टिकट का पैसा कैंडिडेट देगा, जबकि उस देश में ये कंपनी की ज़िम्मेदारी है।
- कोई कहे कि दूसरे ज़िलों में सब-एजेंट लगाओ। विदेश मंत्रालय की गाइड साफ़ कहती है कि इमिग्रेशन क़ानून में सब-एजेंट की इजाज़त नहीं है (विदेश मंत्रालय की गाइड)।
- डिमांड के ट्रेड और कंपनी के वीज़ा की कैटेगरी आपस में मेल नहीं खाते।
नर्सों और महिला कामगारों जैसी कुछ कैटेगरी पर ईसीआर देशों के लिए ख़ास नियम हैं, ऐसी डिमांड लेने से पहले विदेश मंत्रालय के सवाल-जवाब वाला पेज ज़रूर पढ़ो (विदेश मंत्रालय)। भाई, एक गलत भर्ती छोड़ देना आपके लाइसेंस, आपके नाम और आपके कैंडिडेट, तीनों को बचाता है।
कैंडिडेट की फ़ाइल पहले दिन से साफ़ रखो
कागज़ ठीक निकले, तो अगला ख़तरा आपके अपने ऑफ़िस में है: दस तरह के CV, गलत पासपोर्ट नंबर, ईसीआर लिखा ही नहीं, और एक्सपीरियंस की तारीख़ें सर्टिफ़िकेट से अलग। यही सब क्लाइंट इंटरव्यू, वीज़ा स्टैंपिंग और क्लियरेंस में देर करवाते हैं।
तीन आदतें काम आती हैं:
- हर कैंडिडेट का CV एक ही फ़ॉर्मेट में। Resume Arab के बिज़नेस डैशबोर्ड से कैंडिडेट आपकी एजेंसी के लिंक से गल्फ वाला CV बनाते हैं, सबका एक जैसा। एजेंसियाँ इसे कैसे इस्तेमाल करती हैं, ये हमारी एजेंसी वाली गाइड में है।
- शॉर्टलिस्ट से पहले मिलान। CV का ट्रेड, डिमांड का ट्रेड और सर्टिफ़िकेट का ट्रेड, तीनों मिलाओ।
- ईसीआर वाले कैंडिडेट की अलग लिस्ट। उन्हें क्लियरेंस चाहिए, और कुछ कैटेगरी में एम्बेसी का अटेस्टेशन भी। उन्हें हमारी ईसीआर गाइड भेज दो।
सवाल-जवाब
इमिग्रेशन क्लियरेंस के लिए एजेंट को कौन से कागज़ चाहिए?
स्किल्ड और सेमी-स्किल्ड कामगार के लिए पासपोर्ट और वीज़ा, कंपनी का ओरिजिनल कॉन्ट्रैक्ट, डिमांड लेटर, पावर ऑफ़ अटॉर्नी, फ़ीस का चालान और बीमा योजना की पॉलिसी। कुछ कैटेगरी में एम्बेसी का अटेस्टेशन भी।
क्या डिमांड लेटर पर भारतीय एम्बेसी का अटेस्टेशन ज़रूरी है?
महिला और अनस्किल्ड कामगार के कागज़ों पर ज़रूरी है। अपनी कैटेगरी का ताज़ा नियम ईमाइग्रेट पर देख लो।
क्या दूसरे ज़िलों में सब-एजेंट रख सकते हैं?
नहीं भाई। विदेश मंत्रालय के मुताबिक क़ानून में सब-एजेंट की इजाज़त नहीं है। रजिस्टर्ड एजेंट के तौर पर सीधे भर्ती करो।
गल्फ की कंपनी असली है, ये कैसे पता करें?
ऑफ़िशियल फ़ोन और ईमेल पर बात करो, कमर्शियल रजिस्ट्रेशन देखो, सैलरी बाज़ार से मिलाओ, और ऐसी डिमांड मत लो जिसमें कंपनी का ख़र्च कैंडिडेट से माँगा जा रहा हो।
अपनी भर्ती Resume Arab पर डालो
वेरिफ़ाइड एजेंसियाँ Resume Arab पर अपनी असली जॉब डाल सकती हैं और कैंडिडेट की लीड पा सकती हैं, सबके CV एक ही गल्फ फ़ॉर्मेट में। चेक की हुई जॉब देखो या बिज़नेस पेज से शुरू करो।
